यह पेज अंग्रेज़ी गाइड के मुख्य हिस्सों का अनुवाद है। हर अवस्था के पूरे क़दम, बाज़ार, खेती का हिसाब और सभी स्रोत अंग्रेज़ी गाइड में हैं।
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ज्वार सूखे, गर्म और कठिन इलाकों की फसल है। जहां मक्का प्यास से मर जाती है, वहां ज्वार इंतज़ार करती है और फिर बढ़ती रहती है। अफ़्रीका और एशिया के सूखे इलाकों के लाखों परिवारों के लिए बुरे साल में यही खाने और भूखे रहने के बीच का फ़र्क है। यह दुनिया के सबसे सूखा-सहनशील खाद्य अनाजों में से एक है।
एक नज़र में
बुवाई से फसल तक
लगभग 3 से 5 महीने, किस्म के हिसाब से।
सबसे ज़्यादा क्या चाहिए
गर्मी। इसे मक्का से कम पानी चाहिए और यह उन सूखे दौरों को झेल जाती है जो मक्का को मार देते हैं।
सबसे कठिन हिस्सा
पक्षी। ज्वार किसानों की फसल खोने का सबसे बड़ा अकेला कारण पक्षी हैं।
शुरू करने का सबसे आसान तरीका
बीज सीधे उसी जगह ज़मीन में बोएं जहां पौधा उगेगा। नर्सरी की ज़रूरत नहीं।
ज्वार की खेती, अवस्था-दर-अवस्था
अवस्था 1: ज़मीन तैयार करें
मिट्टी को भुरभुरा करें, खरपतवार निकालें, और बारिश की हर बूंद को रोकें।
अवस्था 2: बीज चुनें और जुटाएं
देसी किस्मों का बीज बचाकर दोबारा बोया जा सकता है। अपनी बारिश और पक्षियों को ध्यान में रखकर किस्म चुनें।
अवस्था 3: बीज की बुवाई
कम गहराई पर, नम मिट्टी में, हर जगह कई बीज डालें, फिर बाद में छंटाई करें।
अवस्था 4: पानी (सिंचाई)
ज्वार सूखे मौसम को किसी भी दूसरे मुख्य अनाज से बेहतर झेलती है। जब यह खराब दिखे तो घबराएं नहीं।
अवस्था 5: निराई और खाद
खरपतवार जल्दी निकालें। सूखे इलाके में खरपतवार सिर्फ़ भोजन नहीं, पानी भी चुराता है।
अवस्था 6: पक्षियों से बचाएं
ज्वार की यही सबसे बड़ी समस्या है। इसकी योजना बुवाई से पहले बनाएं, बाद में नहीं।
अवस्था 7: कटाई का सही समय पहचानें
तब काटें जब दाना सख़्त हो और भुट्टे (बाली) का रंग बदल जाए, और फसल को खड़ा न छोड़ें।
अवस्था 8: सुखाएं और ऐसे रखें कि नुकसान न हो
अच्छी तरह सुखाएं, कसकर भरें, दाना साबुत रखें। आटा सिर्फ़ ज़रूरत भर पीसें।
हर अवस्था के विस्तृत क़दम और "कैसे पता चले कि सही हुआ" अंग्रेज़ी गाइड में हैं।
आम समस्याएं और उपाय
अगर दिखे: ज्वार के बीच चमकीले गुलाबी, बैंगनी या सफ़ेद फूलों वाले छोटे पौधे, जबकि आसपास की ज्वार बारिश आने के बावजूद ठिगनी, पीली और मुरझाती हुई हो।
इसका मतलब: स्ट्राइगा, जिसे विचवीड भी कहते हैं। यह ज़मीन के नीचे ज्वार की जड़ों से चिपककर उनका रस पीती है। जब तक आपको फूल दिखते हैं, यह कई हफ़्तों से रस चूस रही होती है।
क्या करें:
हर स्ट्राइगा पौधे को फूल आने और बीज बनने से पहले हाथ से उखाड़ें। एक पौधा दसियों हज़ार बीज बना सकता है जो आपकी मिट्टी में सालों ज़िंदा रहते हैं।
जो उखाड़ें उसे जला दें या गहरा दबा दें। खेत के किनारे न फेंकें।
स्ट्राइगा थकी और भूखी मिट्टी में सबसे ज़्यादा होती है। गोबर की खाद, कम्पोस्ट और खाद, तीनों इसे कम करते हैं।
ज्वार के साथ फसल-चक्र में लोबिया, मूंगफली या कोई और दलहनी फसल उगाएं। इनकी जड़ें स्ट्राइगा के बीजों को तब उगा देती हैं जब चिपकने के लिए ज्वार की जड़ नहीं होती, इसलिए स्ट्राइगा रस चूसने से पहले ही मर जाती है।
बुरी तरह संक्रमित ज़मीन पर साल-दर-साल ज्वार न उगाएं।
अपने इलाके के लिए स्ट्राइगा झेलने वाली किस्मों के बारे में स्थानीय कृषि अधिकारी से पूछें।
अगर दिखे: बालियां एक तरफ़ से या ऊपर से खाली। दाना गायब, पर बाली खड़ी। पास जाने पर खेत से छोटे पक्षियों के झुंड उड़ते हैं।
इसका मतलब: पक्षी। ज़्यादातर इलाकों में ज्वार के नुकसान का यही सबसे बड़ा अकेला कारण है।
क्या करें:
सुबह-सवेरे और दोपहर बाद खेत की रखवाली करें। यही पक्षियों के खाने का मुख्य समय है।
आवाज़ और हिलती चीज़ों का इस्तेमाल करें, और हर कुछ दिन में डराने वाली चीज़ों की जगह बदलें। पक्षी जल्दी सीख जाते हैं।
दाना सख़्त होते ही कटाई करें। फसल खड़ी न छोड़ें।
अगले मौसम में अपने पड़ोसियों के साथ ही बुवाई करें, ताकि कोई एक खेत अकेला पका हुआ न रहे।
अगले मौसम में कसी हुई बाली, लंबे रोएं (कांटे), या गहरे रंग के कड़वे दाने वाली किस्म पर विचार करें, जिनसे पक्षी बचते हैं।
अगर दिखे: बाली के दानों की जगह फूले हुए, सख़्त, गहरे भूरे या काले दाने। दबाने पर ये काले पाउडर में फट जाते हैं। कभी-कभी पूरी बाली काली होती है।
इसका मतलब: यह कंडुआ (स्मट) रोग है। यह बीज और संक्रमित मिट्टी के ज़रिए एक मौसम से अगले मौसम तक जाता है।
क्या करें:
जिस बाली या खेत में यह रोग रहा हो, उससे कभी बीज न बचाएं।
अगर रोगी बालियां कम हैं, तो काला पाउडर स्वस्थ बालियों पर उड़ने से पहले उन्हें उखाड़कर जला दें।
अगले मौसम के लिए स्वस्थ खेत या भरोसेमंद स्रोत से साफ़ बीज लें। साफ़ बीज ही मुख्य बचाव है।
एक ही खेत में साल-दर-साल ज्वार न बोएं। दलहनी फसल के साथ फसल-चक्र अपनाएं।
अगर बीजोपचार की दवा इस्तेमाल करें, तो लाइसेंसधारी विक्रेता से लें और लेबल का पालन करें। बिना लेबल वाला बाज़ारू पाउडर कभी इस्तेमाल न करें।
इस गाइड की ईमानदार सीमाएं
बुवाई का महीना हर जगह अलग है। जो नियम हर जगह लागू होता है वह यह है: जब बारिश सच में शुरू हो जाए तब बोएं, ताकि फूल आने के समय नमी रहने की संभावना हो।
सूखे इलाके में पौधों की दूरी गीले इलाके से जानबूझकर ज़्यादा रखी जाती है, और स्थानीय तरीका आमतौर पर सही होता है। किसी भी किताबी आंकड़े पर चलने से पहले, इस गाइड के आंकड़े सहित, अपने पड़ोसियों से पूछें।
कौन-सी किस्में स्ट्राइगा, मिज (कीट) या पक्षियों को झेलती हैं, यह पूरी तरह स्थानीय है और बदलता रहता है। अपने स्थानीय कृषि अधिकारी से पूछें।