LAISHA

भिंडी की खेती कैसे करें

Abelmoschus esculentus

हिंदी अनुवाद — Laisha

यह पेज अंग्रेज़ी गाइड के मुख्य हिस्सों का अनुवाद है। हर अवस्था के पूरे क़दम, बाज़ार, खेती का हिसाब और सभी स्रोत अंग्रेज़ी गाइड में हैं। Read the full guide in English →

भिंडी उन गिनी-चुनी सब्ज़ियों में से है जो तेज़ गर्मी में भी पैदावार देती रहती है, ठीक उसी समय जब ज़्यादातर दूसरी सब्ज़ियां बंद हो जाती हैं और जब घर को बेचने और खाने के लिए किसी चीज़ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। यह बुवाई के दो महीने के भीतर फल देने लगती है और फिर महीनों तक, हर दो-तीन दिन में, उन्हीं पौधों से फल देती रहती है। छोटे किसान के लिए यह पैटर्न कुल उपज से ज़्यादा मायने रखता है: यह ऐसी फसल है जो एक बार नहीं, लगातार थोड़ा-थोड़ा पैसा देती है। यह दक्षिण एशिया, पश्चिम अफ़्रीका, मध्य-पूर्व और अमेरिका में उगाई जाती है, इसे किसी ख़ास मशीन की ज़रूरत नहीं, और साधारण किस्म का बीज बचाकर फिर बोया जा सकता है।

एक नज़र में

बुवाई से फसल तकपहली फलियां बुवाई के लगभग 45 से 60 दिन बाद तैयार होती हैं, और अगर नियमित तोड़ी जाएं और पानी मिले तो पौधा दो से तीन महीने या ज़्यादा तक फल देता रहता है।
सबसे ज़्यादा क्या चाहिएगर्मी और नियमित तुड़ाई। भिंडी उस तापमान में अच्छी बढ़ती है जिसमें ज़्यादातर सब्ज़ियां रुक जाती हैं, और यह कितने समय तक फल देगी इस पर सबसे बड़ा असर इसका है कि फलियां हर दो-तीन दिन में तोड़ी जाती हैं या नहीं।
सबसे कठिन हिस्सातुड़ाई में पीछे न रहना। पौधे पर चार दिन छोड़ी गई फली रेशेदार और बेचने लायक नहीं रहती, और उससे भी बुरा, यह पौधे को नई फलियां बनाना बंद करने का संकेत देती है। ज़्यादातर निराशाजनक भिंडी की फसलें कम खाद से नहीं, कम तुड़ाई से होती हैं।
शुरू करने का सबसे आसान तरीकाबीज को रात भर भिगोएं, सीधे गर्म, नम मिट्टी में बोएं, और पहली फली दिखते ही हर दूसरे या तीसरे दिन तोड़ने का पक्का इरादा करें। यही एक आदत ज़्यादातर नतीजा तय करती है।

भिंडी की खेती, अवस्था-दर-अवस्था

अवस्था 1: ज़मीन तैयार करें

भरपूर जैविक पदार्थ वाली गहरी, भुरभुरी, अच्छी जल-निकासी वाली क्यारी तैयार करें, क्योंकि यह पौधा गहरी जड़ें बनाता है और महीनों उसी ज़मीन में खड़ा रहता है।

अवस्था 2: बीज चुनें और जुटाएं

अपने मौसम और खरीदार के लायक किस्म चुनें, और बीज के सख़्त छिलके का उपचार करें ताकि बीज सच में उगे।

अवस्था 3: बीज की बुवाई

सीधे गर्म, नम मिट्टी में इतनी दूरी पर बोएं कि कतारों के बीच चल सकें, क्योंकि आपको महीनों तक हर दूसरे दिन उनके बीच चलना होगा।

अवस्था 4: पानी (सिंचाई)

फूल आने के बाद एक-सी सिंचाई रखें, क्योंकि अनियमित पानी से फलियां टेढ़ी, सख़्त बनती हैं या बनने से पहले गिर जाती हैं।

अवस्था 5: निराई और खाद

पौधे छोटे रहते हुए ज़मीन साफ़ रखें, और लंबी तुड़ाई के मौसम में खाद एक साथ शुरुआत में देने के बजाय किस्तों में दें।

अवस्था 6: फूल आना और कीटों पर नज़र

फूल सिर्फ़ एक दिन खिलते हैं और तुरंत फली बन जाते हैं, और यही वह समय है जब फसल बर्बाद करने वाले कीट आते हैं।

अवस्था 7: तुड़ाई, और लगातार तुड़ाई

कोमल तोड़ें, बार-बार तोड़ें, और पौधे पर कभी कोई फली न छोड़ें, क्योंकि एक भूली फली पूरे पौधे को रुकने का संकेत देती है।

अवस्था 8: ताज़ा रखें और बीज बचाएं

फलियां टिकती नहीं, इसलिए उन्हें जल्दी बाज़ार पहुंचाने के हिसाब से संभालें, और बीज सिर्फ़ उन्हीं फलियों से बचाएं जिन्हें आपने जानबूझकर पकने के लिए छोड़ा।

हर अवस्था के विस्तृत क़दम और "कैसे पता चले कि सही हुआ" अंग्रेज़ी गाइड में हैं।

आम समस्याएं और उपाय

अगर दिखे: बुवाई के एक हफ़्ते या ज़्यादा बाद बहुत कम पौधे निकलना, और कतार से खोदा गया बीज या तो जस-का-तस सख़्त या मिट्टी में नरम होकर सड़ता हुआ।

इसका मतलब: मिट्टी बहुत ठंडी थी, या बीज के सख़्त छिलके ने कभी पानी नहीं सोखा। दोनों आम हैं और दोनों से बचा जा सकता है।

क्या करें:

अगर दिखे: स्वस्थ दिखने वाला पौधा जिसने नए फूल और नई फलियां बनाना बंद कर दिया है, और टहनियों पर दो-तीन बड़ी, रेशेदार, ज़्यादा बढ़ी फलियां अभी भी लटकी हैं।

इसका मतलब: पौधे की कम तुड़ाई हुई। जब पकी फलियों को बीज बनाने दिया जाता है, तो पौधा अपना काम पूरा मान लेता है और नई फलियां बनाना बंद कर देता है।

क्या करें:

अगर दिखे: फलियों में छोटे गोल छेद, अक्सर डंठल वाले सिरे के पास और चारों ओर गहरा घेरा, और फली चीरने पर अंदर सुरंग और बीट।

इसका मतलब: फल छेदक (फ़्रूट बोरर) फली में घुसकर अंदर खा रहा है। फली बिकने लायक नहीं रहती और कीड़ा बाहर डाली गई किसी भी चीज़ से सुरक्षित रहता है।

क्या करें:

इस गाइड की ईमानदार सीमाएं

भिंडी के रोग और कीट

भिंडी के 4 रोग और कीट — पहचान, लक्षण, जीवन-चक्र और रोकथाम, हिंदी में।

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