LAISHA

सहजन (मोरिंगा) की खेती कैसे करें

Moringa oleifera

हिंदी अनुवाद — Laisha

यह पेज अंग्रेज़ी गाइड के मुख्य हिस्सों का अनुवाद है। हर अवस्था के पूरे क़दम, बाज़ार, खेती का हिसाब और सभी स्रोत अंग्रेज़ी गाइड में हैं। Read the full guide in English →

सहजन (मोरिंगा) लगभग किसी भी पेड़ से तेज़ बढ़ता है जिसे छोटा किसान लगा सकता है, कमज़ोर सूखी ज़मीन पर जहां बहुत कम कुछ और उगता है, और यह सालों में नहीं, महीनों में भोजन देता है। पत्तियां सब्ज़ी हैं, और सुखाकर पीसने पर एक ज़्यादा कीमत वाला उत्पाद जिसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है। कोमल फलियां वही ड्रमस्टिक (सहजन की फली) हैं जो पूरे दक्षिण एशिया में बिकती हैं। बीज से तेल निकलता है, और बची खली गंदा पानी साफ़ करने में काम आती है। फलियां सबसे ज़्यादा भारत पैदा करता है, और यह पेड़ अब अफ़्रीका, दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया, और उष्णकटिबंधीय लैटिन अमेरिका में उगाया जाता है, अक्सर खेत की फसल के बजाय बाड़ या घर के पिछवाड़े के पेड़ के रूप में। सूखी ज़मीन वाले घर के लिए, इतने कम में इतना देने वाले पौधे कम ही हैं।

एक नज़र में

बुवाई से फसल तकपत्तियां लगभग दो-तीन महीने में, और पहली फलियां लगभग आठ से बारह महीने में।
सबसे ज़्यादा क्या चाहिएगर्मी, धूप और जल-निकासी। यह लंबा सूखा झेल जाता है और गीली ज़मीन में मर जाता है।
सबसे कठिन हिस्साइसे छोटा रखना। अकेला छोड़ने पर यह एक ऊंचा, नंगा खंभा बन जाता है जिसका सारा भोजन पहुंच से बाहर होता है।
शुरू करने का सबसे आसान तरीकाबारिश की शुरुआत में बीज बोएं या मोटी कलम लगाएं, और लगभग एक मीटर ऊंचा होने पर ऊपर का सिरा काट दें।

सहजन की खेती, अवस्था-दर-अवस्था

अवस्था 1: ज़मीन तैयार करें

लगभग कोई भी गर्म, अच्छी जल-निकासी वाली ज़मीन चलेगी, और उर्वरता से कहीं ज़्यादा जल-निकासी मायने रखती है।

अवस्था 2: बीज और रोपण सामग्री चुनें

मज़बूत, गहरी जड़ वाले पेड़ के लिए ताज़ा बीज बोएं, या तेज़ी के लिए मोटी कलम लगाएं।

अवस्था 3: बुवाई या रोपाई

बारिश की शुरुआत में, उथला, गर्म ज़मीन में लगाएं।

अवस्था 4: पानी (सिंचाई)

जमाने के लिए पानी दें, फिर लगभग कभी नहीं, क्योंकि यहां ख़तरा कम नहीं, ज़्यादा पानी का है।

अवस्था 5: छंटाई, निराई और खाद

ऊपर का सिरा जल्दी काटें और काटते रहें, क्योंकि बिना छंटाई का सहजन पूरी उपज पहुंच से बाहर कर देता है।

अवस्था 6: फूल आना और फलियां बनना

मलाई जैसे फूलों के गुच्छे जल्दी आते हैं, और कीट वह पराग ले जाते हैं जो उन्हें फलियों में बदलता है।

अवस्था 7: परेशानी पर नज़र रखें

पत्तियों पर सुंडियां (बालदार इल्ली), फलियों में फल मक्खी, और गीली ज़मीन में जड़ सड़न।

अवस्था 8: पत्तियों और फलियों की तुड़ाई

कटी टहनियों से पत्तियां उतारें, और फलियां तब तोड़ें जब वे अभी चटककर टूटती हों।

अवस्था 9: सुखाएं, भंडारण करें और बेचें

पत्तियां छाया में सुखाएं, धूप में कभी नहीं, क्योंकि धूप वही नष्ट करती है जिसका खरीदार दाम देता है।

हर अवस्था के विस्तृत क़दम और "कैसे पता चले कि सही हुआ" अंग्रेज़ी गाइड में हैं।

आम समस्याएं और उपाय

अगर दिखे: तीन-चार मीटर ऊंचा पतला पेड़, नंगा तना, और सारी पत्तियां और फलियां सबसे ऊपर पहुंच से बाहर।

इसका मतलब: इसकी कभी छंटाई नहीं हुई। सहजन रोके बिना सीधा ऊपर बढ़ता है, और ऐसा करने दिया गया पेड़ अपनी पूरी उपज वहां रखता है जहां कोई तोड़ नहीं सकता।

क्या करें:

अगर दिखे: स्वस्थ, तेज़ी से बढ़ता पेड़ कुछ हफ़्तों में पीला होकर मुरझाता और मर जाता है, आमतौर पर भारी बारिश के बाद, और खोदने पर जड़ें नरम और काली।

इसका मतलब: जलभराव वाली ज़मीन से जड़ सड़न। सहजन के मरने का यही सबसे आम तरीका है, और यह उस पेड़ को मार देती है जिसने तीन महीने का सूखा बिना शिकायत झेला था।

क्या करें:

अगर दिखे: सूखा पत्ती पाउडर चमकीले हरे के बजाय फीका पीला-भूरा निकला और उसमें भूसे जैसी गंध है।

इसका मतलब: इसे धूप में सुखाया गया, या नम हवा में बहुत धीरे सुखाया गया। धूप वह बहुत कुछ नष्ट करती है जो पाउडर को कीमती बनाता है, और रंग उसका दिखने वाला सबूत है।

क्या करें:

इस गाइड की ईमानदार सीमाएं

आयुर्वेद में

यह पौधा आयुर्वेद का एक द्रव्य भी है: Shigru — वानस्पतिक पहचान, रस-गुण-वीर्य, कर्म, शास्त्रों में दी मात्रा और सुरक्षा।

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