LAISHA

जीवाणु म्लानि (बैक्टीरियल विल्ट)

Ralstonia solanacearum species complex · जीवाणु रोग

हिंदी अनुवाद — Laisha

यह पेज अंग्रेज़ी पेज के मुख्य हिस्सों का अनुवाद है: पहचान, जीवन-चक्र का सार और रोकथाम। फैलाव, आर्थिक सीमा (ETL), निगरानी, मिलते-जुलते कीट-रोग और सभी स्रोत अंग्रेज़ी पेज पर हैं। Read in English →

मिट्टी और पानी से फैलने वाला एक जीवाणु जो टमाटर, आलू, बैंगन, मिर्च, मूंगफली, अदरक, केला और सैकड़ों दूसरे पौधों के पानी ले जाने वाले ऊतक को बंद कर देता है, जिससे वे हरे रहते हुए अचानक मुरझा जाते हैं। यह दुनिया के सबसे विनाशकारी पौध-जीवाणुओं में से है। संक्रमित पौधे ठीक नहीं हो सकते, जीवाणु मिट्टी और पानी में सालों बचा रहता है, और इसका एक ठंडी जलवायु वाला स्ट्रेन आलू का कड़ाई से नियंत्रित संगरोध (क्वारंटीन) कीट है।

पहचान

रोगजनक

एक छड़ के आकार का जीवाणु। खेत की आसान जांच: अभी-अभी मुरझाए पौधे के निचले तने का एक टुकड़ा काटें, उसे साफ़ गिलास के पानी में लटकाएं, और कुछ ही मिनटों में कटे सिरे से जीवाणु रिसाव के दूधिया सफ़ेद धागे बहने लगते हैं। पुष्टि और स्ट्रेन की पहचान के लिए प्रयोगशाला जांच चाहिए।

फसल में लक्षण, अवस्था-दर-अवस्था

छोटे पौधेशुरू में दिन की गर्मी में सबसे नई पत्तियों का मुरझाना और रात में ठीक हो जाना; फिर पत्तियां हरी रहते हुए स्थायी मुरझाना।
जमे हुए पौधेपूरे पौधे या एक तरफ़ का अचानक मुरझाना; निचला तना काटने पर पानी ले जाने वाले ऊतक का भूरा रंग; टमाटर के तनों पर अपस्थानिक (एडवेंटिशियस) जड़ें।
आलू के कंदकंद काटने पर संवहन ऊतक में भूरा छल्ला, धूसर-सफ़ेद जीवाणु रिसाव के साथ; कंद की आंखों पर रिसाव और चिपकी मिट्टी ('भूरा सड़न')।

रोग-चक्र

जीवाणु मिट्टी, पौधों के अवशेष, खरपतवारों की जड़ों, संक्रमित कंदों और प्रकंदों, और सतही व सिंचाई के पानी में बचा रहता है। यह घावों से जड़ों में घुसता है, जिनमें सूत्रकृमि (नेमाटोड) और गुड़ाई से बने घाव भी हैं, ज़ाइलम में बढ़ता है और पानी का बहाव रोक देता है। जड़ों और मरते पौधों से जीवाणु फिर मिट्टी और पानी में छूट जाते हैं।

हर अवस्था की अवधि, तापमान और साल में पीढ़ियों की संख्या अंग्रेज़ी पेज पर है।

रोकथाम और नियंत्रण (समन्वित प्रबंधन)

नियंत्रण एक क्रम में सबसे अच्छा काम करता है: पहले रोकथाम, फिर निगरानी, और कार्रवाई सिर्फ़ तब जब आर्थिक सीमा या जोखिम का पूर्वानुमान कहे — सबसे कम बाधा डालने वाले असरदार विकल्प से।

खेती के तरीके (कल्चरल नियंत्रण)

यांत्रिक और भौतिक नियंत्रण

जैविक नियंत्रण

प्रतिरोधी किस्में (होस्ट रेज़िस्टेंस)

रासायनिक नियंत्रण — सिर्फ़ कार्य-प्रणाली समूह से

Laisha रासायनिक विकल्पों को सिर्फ़ उनके प्रतिरोध-समिति वाले कार्य-प्रणाली (mode-of-action) समूह से बताती है — कीट, माइट और सूत्रकृमि के लिए IRAC, फफूंद, ऊमाइसीट और जीवाणु के लिए FRAC, खरपतवार के लिए HRAC — कभी सक्रिय तत्व (active ingredient) या उत्पाद के नाम से नहीं। क्या पंजीकृत है यह देश के हिसाब से अलग है और समय के साथ बदलता है; कौन-सी दवा किस फसल पर, कितनी मात्रा में और तुड़ाई से कितने दिन पहले तक इस्तेमाल हो सकती है, यह लेबल और आपके स्थानीय पौध-संरक्षण अधिकारी तय करते हैं।

कोई भी रसायन जीवाणु म्लानि को ठीक नहीं करता या मिट्टी को भरोसे से साफ़ नहीं करता; कीटाणुनाशक सिर्फ़ औज़ारों, जूतों और उपकरणों के लिए इस्तेमाल होते हैं। क्या पंजीकृत है यह देश के हिसाब से अलग है और समय के साथ बदलता है; लेबल और अपने स्थानीय पौध-संरक्षण अधिकारी के अनुसार चलें।

मुख्य फसलें

टमाटर, आलू, बैंगन, मिर्च, मूंगफली, तंबाकू, केला, अदरक

यह सामान्य जानकारी है, पर्चा नहीं: पहचान की पुष्टि स्थानीय रूप से करें और लेबल और अपने पौध-संरक्षण अधिकारी के अनुसार चलें।

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